उज्ज्वल हिमाचल। ज्वाली
पौंग झील के मध्य पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान स्वर्ग जाने के लिए निर्मित की गई बाथू दी लड़ी झील का जलस्तर कम होने पर चार महीने पर्यटकों की आस्था का केंद्र बनी रही, लेकिन अब झील का जलस्तर बढऩे के साथ ही झील के गहरे पानी में समाने शुरू हो गई है। झील के बढ़ते जलस्तर ने बाथू दी लड़ी को चारों तरफ से घेर लिया है तथा बाथू दी लड़ी का परिसर व मन्दिर आधे-आधे पानी मे समा गए हैं। जिस गति से झील का जलस्तर बढ़ रहा है, उस लिहाज से 15-20 दिनों में यह स्थल बिल्कुल पानी में समा जाएगा। हालांकि अभी भी पर्यटक यहां पर आ रहे हैं और दूर से ही बाथू दी लड़ी के दर्शन करके वापिस चले जा रहे हैं।

अब यह स्थल करीबन आठ माह तक पानी में समाया रहेगा। मौजूदा समय में पौंग झील का जलस्तर 1329.15 फीट पहुंच चुका है। झील में 26751 क्यूसिक पानी आ रहा है जबकि 18 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। बुद्धिजीवियों ने कहा कि पानी बढऩे के कारण अब काफी दलदल हो चुकी है तथा प्रशासन-पुलिस व वन्य प्राणी विभाग को चाहिए कि यहां पर पर्यटकों का जाना प्रतिबंधित किया जाए ताकि कोई अप्रिय घटना घटित न हो पाए। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां रुके थे तथा कुछ दिन यहां पर विश्राम किया था।

इस दौरान द्रोपदी के नहाने के लिए कुआं का निर्माण किया था तथा पूजा अर्चना के लिए मन्दिर बनाया गया था। इस स्थल पर प्रवेशद्वार व निकासी द्वार भी निर्मित थे। स्वर्ग को जाने के लिए एक लड़ी का निर्माण शुरू किया था जिसको एक ही रात में बनाना था। पांडवों ने छह माह की एक रात बना दी तथा जैसे ही स्वर्ग पहुंचने के लिए अढ़ाई सीढिय़ां शेष रहीं तो पास में तेल निकाल रही तेलिन चिल्ला उठी जिसकी आवाज सुनकर पांडव इसको छोडक़र आगे चले गए तथा सीढियां गिर गईं जोकि अब मात्र एक मीनार जैसी ही खड़ी है।





