उज्जवल हिमाचल । धर्मशाला
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विनय शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल की जनता अब भाषणों, घोषणाओं और योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति से ऊब चुकी है। चार साल का कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन जिस ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना’ के तहत महिलाओं को ₹1500 प्रतिमाह देने का वादा किया गया था, उसी ₹1500 के लिए अब ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना के नाम से नया ऐलान किया जा रहा है। सवाल सीधा है—पुरानी योजना का क्या हुआ और चार साल में हर पात्र महिला को उसका पूरा लाभ क्यों नहीं मिला?
विनय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले महिलाओं को ₹1500 देने का बड़ा वादा किया था। अब सरकार की ओर से नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को फिर ₹1500 प्रतिमाह देने और पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की गई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना को 2 अक्टूबर से लागू करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता यह जानना चाहती है कि यह नई योजना वास्तव में नया लाभ है या पुराने वादे को नए नाम और नए प्रचार के साथ दोबारा पेश करने की कोशिश?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादों की झड़ी लगा दी थी। महिलाओं को ₹1500, युवाओं को रोजगार, महंगाई से राहत और जनता को बेहतर सुविधाओं के सपने दिखाए गए। लेकिन आज स्थिति यह है कि सरकार को अपने ही पुराने वादों को नए नामों के साथ दोहराकर राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना पड़ रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“चार साल तक ₹1500 की राह देखती महिलाओं के लिए अब नया नाम आ गया, लेकिन सवाल वही है—पैसा कब आएगा?”
विनय शर्मा ने कहा कि ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना’ वास्तव में राज्य सरकार की मौजूदा योजना है और सरकारी स्रोतों के अनुसार इसके तहत पात्र महिलाओं को ₹1500 मासिक सहायता देने का प्रावधान है। ऐसे में सरकार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ में घोषित ₹1500 और पहले से चल रही ₹1500 वाली योजना में वास्तविक अंतर क्या है? कितनी महिलाओं को पहले योजना के तहत लाभ मिला, कितनी पात्र हैं और नई योजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान कितना किया गया है?
उन्होंने कहा कि अब 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा भी कर दी गई है। अगर सरकार वास्तव में जनता को राहत देना चाहती है तो वह घोषणा से आगे बढ़कर इसकी स्पष्ट पात्रता, बजट, समयसीमा और लागू होने की ठोस व्यवस्था सार्वजनिक करे। केवल मंचों से घोषणा करना और बाद में उसके प्रचार के लिए नए नाम गढ़ना जनता के साथ न्याय नहीं है।
विनय शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के लगभग चार वर्ष के कार्यकाल में घोषणाओं का ढेर बढ़ता गया, लेकिन धरातल पर काम घटता गया। प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, कमजोर होती स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक दबाव और विकास कार्यों में कथित सुस्ती से परेशान है, जबकि सरकार बार-बार नई घोषणाओं के जरिए अपनी छवि चमकाने में लगी हुई है।
उन्होंने कहा कि “कांग्रेस सरकार को अब घोषणा पत्र नहीं, हिसाब पत्र लेकर जनता के बीच जाना चाहिए।” मुख्यमंत्री बताएं कि सत्ता में आने से पहले किए गए कितने वादे पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और कितने वादों को नए नाम देकर दोबारा जनता के सामने रखा जा रहा है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल की जनता इतनी भोली नहीं है कि एक ही वादे को अलग-अलग नामों में सुनकर उसे नई उपलब्धि मान ले। जनता को अब भाषण नहीं, परिणाम चाहिए; घोषणा नहीं, पैसा चाहिए; योजना का नाम नहीं, योजना का लाभ चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि 2027 में जनता घोषणाओं का नहीं, चार साल के काम का हिसाब करेगी। उस समय सरकार को यह बताना पड़ेगा कि जिन महिलाओं से ₹1500 का वादा किया गया था, उन्हें कितना मिला; जिन परिवारों को राहत देने की बात कही गई थी, उन्हें कितनी राहत मिली; और जिन युवाओं को रोजगार का सपना दिखाया गया था, उनके हाथ में कितने रोजगार आए।
विनय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को “नाम बदलो, प्रचार करो और जनता को भ्रमित करो” की राजनीति छोड़कर धरातल पर काम करना चाहिए। यदि सरकार के पास संसाधन हैं तो जनता को राहत दे, यदि बजट है तो योजनाओं को लागू करे और यदि योजनाएं लागू नहीं हो सकतीं तो जनता को गुमराह करने वाली घोषणाएं बंद करे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता अब पूछ रही है—चार साल में ₹1500 नहीं मिले तो नए नाम से फिर ₹1500 का ऐलान क्यों? 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा अब क्यों? और इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की तारीख, बजट और स्पष्ट कार्ययोजना कहां है?
विनय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास अब भाषणों का समय समाप्त हो चुका है। जनता को हिसाब चाहिए और सरकार को जवाब देना ही होगा।





