उज्ज्वल हिमाचल। कांगड़ा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज टांडा के कार्डियोथोरेसिक और वस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने अपनी पहली सफल कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट (CABG) सर्जरी की है, जिससे एक 47 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी मिली है। जानकारी देते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के प्राचार्य डॉक्टर मिलाप शर्मा ने कहा कि इस सफल सर्जरी में सर्जरी टीम में डॉ. देशबंधु शर्मा (विभागाध्यक्ष), डॉ. विकास पंवार, डॉ. पुनीत शर्मा शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. भारती गुप्ता, डॉ. धीरज, डॉ. अमन ठाकुर और डॉ. आर्यन शामिल थे। पैरामेडिकल स्टाफ ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कांगड़ा जिले के एक छोटे से गांव का निवासी, मरीज पिछले एक साल से सीने में दर्द और सांस फूलने की समस्या से पीड़ित था। जांच में पाया गया कि उसके हृदय की तीनों धमनियां बंद थीं, जिससे उसे दिल का दौरा पड़ने का खतरा था। मरीज की स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने CABG सर्जरी का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि 8 अगस्त को मरीज को हृदय शल्य चिकित्सा के लिए लिया गया। सर्जरी टीम ने तीनों बंद धमनियों को बायपास ग्राफ्टिंग की। सर्जरी के दौरान हृदय-फेफड़े की मशीन का उपयोग किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया और वह तेजी से ठीक हो रहा है। डॉ मिलाप शर्मा ने बताया कि कार्डियोथोरेसिक और वस्कुलर सर्जरी विभाग ने नियमित रूप से हृदय शल्य चिकित्सा की जा रही है, जिसमें हृदय वाल्व की मरम्मत और प्रतिस्थापन, जन्मजात दोषों की मरम्मत और कार्डियक ट्यूमर की निकासी शामिल है।

विभाग ने वस्कुलर और फेफड़े की सर्जरी भी सफलतापूर्वक की है। मरीज का इलाज हिमकेयर योजना के तहत किया गया, जिससे उसे आर्थिक बोझ से राहत मिली। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि जल्द ही कुछ और उपकरणों की उपलब्धता के साथ और अधिक जटिल सर्जरी करने में सक्षम हो सके, ताकि सभी मरीजों को समय पर और उनके दरवाजे पर हृदय शल्य चिकित्सा की सुविधा मिल सके। यह उपलब्धि टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए एक बड़ी सफलता है और मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।





