उज्ज्वल हिमाचल। कांगड़ा
गर्मी और उमस का मौसम आते ही एक आम लेकिन परेशान करने वाला रोग फिर सिर उठाता है, जिसे हम आम बोलचाल में आंखों का फ्लू कहते हैं। यह बात एसएमआई अस्पताल घुरकड़ी निर्देशक व चीफ आई सर्जन डॉ संदीप महाजन ने कही। उन्होंने कहा कि मेडिकल भाषा में इसका नाम है वायरल कंजंक्टिवाइटिस। हर साल जुलाई-अगस्त में यह रोग तेज़ी से फैलता है, खासकर स्कूलों, दफ्तरों, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले स्थानों में।

कैसे फैलता है यह संक्रमण
उन्होंने कहा की इसका मुख्य कारण होता है एडेनोवायरस। यह वायरस हवा से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के स्पर्श या चीज़ों से फैलता है। तौलिया, तकिया, चादर, मोबाइल, दरवाज़े के हैंडल, पेन, चश्मा – ये सब वायरस को फैलाने वाले ज़रिए बन सकते हैं। यह वायरस किसी सतह पर 30 दिन तक जीवित रह सकता है।
लक्षण क्या हैं?
- आंखों में लाली और जलन
- पानी आना या चिपचिपा स्राव
- पलकें चिपक जाना
- रोशनी से चिढ़
- कभी-कभी सूजन और दर्द
क्या करें और क्या न करें
- दिन में कई बार साबुन से हाथ धोएं
- आंखें साफ और सूखी रखें
- अलग तौलिया और रुमाल इस्तेमाल करें
- स्कूल या ऑफिस में संक्रमण है तो घर पर रहे।
आंखें बार-बार न छुएं
- किसी और का तौलिया या तकिया न लें
- बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न डालें
- स्टेरॉयड ड्रॉप्स खुद से बिल्कुल न लें
डॉ संदीप महाजन ने कहा कि यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है। आमतौर पर 5-7 दिन में आंखों में जलन या सूखापन हो तो आर्टिफिशियल टियर्स (आंसू की बूंदें) राहत दे सकती हैं। डॉक्टर की सलाह से हल्के एंटीसेप्टिक या एंटीबायोटिक ड्रॉप्स दिए जा सकते हैं।

बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड डाले गए तो गंभीर नुकसान हो सकता है, यहां तक कि नज़रों पर असर भी पड़ सकता है। आंखों की सुरक्षा आपके हाथ में है। हाथ धोना, आंखें न छूना और दूसरों से दूरी यही इस संक्रमण को रोकने का सबसे कारगर उपाय है। इलाज के बजाय बचाव को अपनाइए। आपकी जागरूकता ही आपकी आंखों की सबसे बड़ी रक्षा है।





