सीएसआईआर- आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उत्साहपूर्ण आयोजन

उज्जवल हिमाचल। पालमपुर 
सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने शुक्रवार को अपने परिसर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को उत्साह के साथ मनाया। सर सी.वी. रमन द्वारा 1928 में इस दिन रमन प्रभाव की खोज करने के उपलक्ष में यह दिन मनाया जाता है। वर्ष 1930 में इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सी.एस.आई.आर.-आई.एच.बी.टी. के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संस्थान के हाल के वैज्ञानिक कार्यों की जानकारी दी तथा बताया कि कैसे इनसे जैव-आर्थिकी और आम लोगों का जीवन सुधारने में  मदद मिली है। डॉ. यादव नें फ्लोरीकल्चर और अरोमा मिशनों की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान समाज के लिए है और राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करना इसका मुख्य धेय होना चाहिए। उन्होंने जिज्ञासा  और कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला, जो युवाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित हैं और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. शेखर सी. माण्‍डे, अध्‍यक्ष, भारतीय राष्‍ट्रीय विज्ञान अकादमी एवं पूर्व महानिदेशक, सी.एस.आई.आर  ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्थान की शोध गतिविधियों एवं उद्यमिता विकास एवं ग्रामीण आर्थिकी के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए संस्थान की सराहना की। अपने संबोधन में उन्‍होने रमन प्रभाव की खोज के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की और विज्ञान में जिज्ञासा को प्रेरक शक्ति के रूप में रेखांकित किया। डॉ. माँड़े ने समावेशी विकास के लिए स्वदेशी तकनीकों पर जोर दिया।
डॉ. सुधीर सोपोरी, सीनियर एमेरिटस वैज्ञानिक, आई.सी.जी.ई.बी और पूर्व कुलपति, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, समारोह के सम्मानित अतिथि थे। उन्होंने विज्ञान में संभावनाओं और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर  विस्तार से विचार प्रस्तुत किए।  उन्होंने सभी को एकजुट होकर विज्ञान एवं राष्ट्र को आगे बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का संभाषण डॉ. श्रीदेवी अन्नपूर्णा सिंह, पूर्व निदेशक सी.एस.आई.आर-सी.एफ.टी.आर.आई द्वारा “’भारत में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा: महिलाओं की महत्‍वपूर्ण भूमिका” विषय पर दिया गया। अपने संबोधन में उन्‍होंने देश में खाद्य और पोषण की स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने पारंपरिक खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार और पोषण की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. श्रीदेवी ने उन महिला आदर्शों का उल्लेख किया जिन्होंने देश में विज्ञान को आकार दिया है। विशेष रूप से उन्होंने डॉ. कमला सोहनी के बारे में बताया, जो विज्ञान में पी.एच.डी प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
इस अवसर पर संस्थान ने छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते किए। ये समझौते एम/एस बायोलैक्सी एंजाइम्स प्रा. लि., ठाणे, महाराष्ट्र; एम/एस रेड मिर्ची एसोसिएट्स, जींद, हरियाणा; एम/एस मदन लाल टिश्यू कल्चर लैब, जयसिंहपुर; एम/एस हर्ष एंटरप्राइजेज, पटियाला, पंजाब; एम/एस त्रिमूर्ति उद्योग, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश और बेहतर हिमाचल, गाँव भेल, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर के साथ हुए। शैक्षणिक सहयोग के लिए चितकारा विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
इस अवसर पर इन्‍यूला रेसीमोसा पादप की संस्थान द्वारा विकसित नई किस्‍म ‘हिम पुस्‍करमूल’ का विमोचन भी किया गया। साथ ही संस्‍थान के शोध पर आधारित आर.जे सेंट्स, ऊना के स्टीविया-आधारित उत्‍पादों  की एक नई रेंज को लोकार्पित किया गया। संस्थान ने महिला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कर्मचारियों को उनके उत्तम कार्य के लिए सम्मानित किया।
“सी.एस.आई.आर बायो रिसोर्स कौंजर्वेसन अँड प्रोस्पेक्सन मिशन” के अंतर्गत विकसित किए जा रहे “जैवसंपदा उद्यान” का भी उद्घाटन किया गया! क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, निकटवर्ती संगठनों के कर्मचारी, सी.एस.आई.आर.-आई.एच.बी.टी. के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों, कर्मियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने समारोह की शोभा बढ़ाई। जवाहर नवोदय विद्यालय पपरोला, कांगड़ा के 39 छात्र एवं 2 शिक्षक ‘जिज्ञासा’ कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह में सम्मिलित हुए।