उज्जवल हिमाचल । पालमपुर
सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT) ने 44वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, किसानों, उद्योगपतियों, विद्यार्थियों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की उपलब्धियों, शोध कार्यों और जैवआर्थिकी (Bioeconomy) को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विशेष प्रकाश डाला गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि संस्थान जैवआर्थिकी को सशक्त बनाने के लिए लगातार अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने सी.एस.आई.आर. के फ्लोरीकल्चर, अरोमा, स्मार्ट विलेज, बायोरिसोर्स कंजर्वेशन एवं प्रॉस्पेक्शन जैसे मिशनों की जानकारी देते हुए कहा कि ये पहल ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, समाज और उद्योगों की आवश्यकताओं को भी पूरा कर रही हैं। उन्होंने संस्थान द्वारा विकसित नई तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं सम्मानित अतिथि डॉ. एस. वेंकट मोहन, निदेशक, सी.एस.आई.आर.-एन.ई.ई.आर.आई. ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्थान की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने “पर्यावरणीय सततता के लिए क्लोजिंग लूप” विषय पर व्याख्यान देते हुए बदलते मौसम, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाओं और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सतत विकास के लिए सर्कुलर इकोनॉमी और प्रभावी कचरा प्रबंधन को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. मधु दीक्षित, नेशनल साइंटिस्ट चेयर (ANRF) एवं सी.एस.आई.आर.-सी.डी.आर.आई. की पूर्व निदेशक, ने संस्थान को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बायो-बेस्ड इकोनॉमी को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान का शोध आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से हर्बल दवाओं के क्षेत्र में अनुसंधान की नई संभावनाओं तथा हिमालयी जैव संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान के महत्व पर जोर दिया।
इस अवसर पर सी.एस.आई.आर.-आई.एच.बी.टी. की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 का विमोचन भी किया गया। वर्षभर उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य करने वाले वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही संस्थान ने छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और दो समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। समारोह के दौरान ‘हिम सेज’ (Him Sage) नामक क्लैरी सेज की नई किस्म जारी की गई तथा किसानों को सुगंधित गेंदा की उन्नत रोपण सामग्री वितरित की गई।
स्थापना दिवस समारोह में किसान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्योगपति, छात्र एवं अन्य गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, पालमपुर के छात्र एवं शिक्षक भी ‘जिज्ञासा’ पहल के अंतर्गत कार्यक्रम में शामिल हुए और संस्थान की वैज्ञानिक गतिविधियों से रूबरू हुए।





