हिमालयी जैवसंसाधनों के संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और परस्पर सहयोग की आधार पर आगे बढ़ें

उज्ज्वल हिमाचल। पालमपुर 
सीएसआईआर – हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में आयोजित दो दिवसीय, हिमालयी जैवसंसाधनों के सतत विकास और संरक्षण हेतु बहु-विषयक दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आज 3 सितंबर सम्पन्न हुई। यह छात्र-प्रेरित पहल डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
अपने उद्घाटन संबोधन में सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संस्थान की नवीनतम गतिविधियों के बारे में जानकारी दी और जैव संसाधनों के संरक्षण और जैव आर्थिकी में उसके योगदान पर प्रकाश डाला।
डॉ. राकेश सहगल, एन.आई.टी, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश), ने इस आयोजन तथा संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होने विचार प्रकट करते हुए कहा की वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं परस्पर सहयोग आज की आवश्यकता हैं जिन पर हमे और अधिक ध्यान देना होगा। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से आए डॉ. पी. के. जोशी ने जैव संसाधनों की मैपिंग और विश्लेषण के लिए सेंसर-आधारित इमेजिंग तकनीकों पर विचार प्रस्तुत किये।
तदोपरांत विशेषज्ञों और छात्रों द्वारा चार सत्रों में प्रस्तुतियाँ दी गईं। पहले सत्र में आई.आई.एफ. एम भोपाल के डॉ. सी.पी. काला ने अल्पाइन चारागाहों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका पर मुख्य व्याख्यान दिया।
दूसरे सत्र में एच.ए.पी.पी.आर.सी, उत्तराखंड के डॉ. वी. के. पुरोहित ने उच्च हिमालयी औषधीय पौधों और उनके महत्व पर प्रकाश डाला। महाराष्ट्र की राइज एंड शाइन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के  ललित अवहद ने जीव विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर चर्चा की।
तीसरे सत्र में नई दिल्ली जे.एन.यू से आए डॉ. पी. के. वर्मा ने पादप कोशिका और आणविक विज्ञान पर विशेषज्ञ वक्तव्य प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. मोहर सिंह, एन.बी.पी. जी. आर, शिमला ने भविष्य के विकास के लिए आनुवंशिक संसाधनों के महत्व को रेखांकित किया।
चौथे सत्र में डॉ. पी.एस. पनेसर, एस.एल.आई.ई.टी, पंजाब ने खाद्य क्षेत्र और इस दिशा में हो रहे अनुसंधानओं पर विचार साझा किए। डॉ. एस. जाचक, एन.आई.पी.ई.आर, पंजाब ने ऑनलाइन माध्यम से सभा को संबोधित किया और फाइटोफार्मास्युटिकल्स तथा प्राकृतिक उत्पादों पर प्रकाश डाला।
इसके अतिरिक्त, छात्रों द्वारा कुल 15 मौखिक एवं 57 पोस्टर प्रस्तुतियाँ दी गई।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा हस्तांतरित तकनीकों पर आधारित उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई तथा मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में दो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। एक ताश्विका इंडिया, नई दिल्ली के साथ और दूसरा महालक्ष्मी माल्ट प्रोडक्टस, हरियाणा के साथ।
संगोष्ठी के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, प्रस्तुतियाँ, पोस्टर और मीम्स के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।