अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. अरुणदीप शर्मा ने प्रस्तुत किया ‘संजीवनी बूटी और विज्ञान’ पर शोधपत्र

उज्जवल हिमाचल । कांगड़ा

मेहर चंद महाजन डीएवी कॉलेज, कांगड़ा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। इसी क्रम में डॉ. अरुणदीप शर्मा ने “संजीवनी बूटी और विज्ञान” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत कर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित किया।

अपने शोधपत्र में डॉ. शर्मा ने रामायण में वर्णित संजीवनी बूटी के संदर्भों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारतीय ग्रंथों में वर्णित अनेक औषधीय वनस्पतियां आज भी वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि संजीवनी बूटी केवल आस्था और पौराणिक कथाओं का विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे निहित औषधीय एवं जैविक गुणों को समझने के लिए आधुनिक विज्ञान निरंतर अनुसंधान कर रहा है।

डॉ. शर्मा ने हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों, उनकी चिकित्सीय उपयोगिता तथा आधुनिक शोधों में उनकी संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में प्रकृति, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान से संबंधित जो ज्ञान समाहित है, वह आज भी मानव कल्याण के लिए अत्यंत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय से नई खोजों और नवाचारों के द्वार खोले जा सकते हैं, जिससे समाज और मानवता को व्यापक लाभ मिल सकता है।

डॉ. शर्मा की प्रस्तुति को सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने खूब सराहा। विषय की रोचकता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। प्रस्तुति के बाद प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. शर्मा ने तथ्यपरक और संतोषजनक उत्तर दिया।

डॉ. शर्मा का यह शोधपत्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेदिक परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा तथा सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।