उज्जवल हिमाचल। कांगड़ा
सर्पदंश हिमाचल प्रदेश में एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, विशेषकर गर्मी और बरसात के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। जानकारी देते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉक्टर मिला शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। सर्पदंश की स्थिति में बिना देरी किए पीड़ित को नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में ले जाना बेहद जरूरी है।
पिछले एक वर्ष के दौरान चिकित्सा विभाग में सर्पदंश के 192 मरीज उपचार के लिए भर्ती हुए, जबकि बाल रोग विभाग में 71 मरीजों का उपचार किया गया। इस तरह कुल 263 सर्पदंश के मामले सामने आए। इनमें से दो मरीजों की मृत्यु हुई। दोनों मरीज स्वास्थ्य व्यवस्था तक काफी देरी से पहुंचे थे। यह स्थिति सर्पदंश के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की आवश्यकता को स्पष्ट करती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश के बाद उपचार में देरी न करें और झाड़-फूंक, पारंपरिक उपचार, अपात्र व्यक्तियों या अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों पर निर्भर न रहें। पीड़ित को जल्द से जल्द और सुरक्षित तरीके से नजदीकी उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचाया जाना चाहिए।
डॉ मिलाप शर्मा ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत सर्पदंश के उपचार की सुविधाओं को मजबूत किया है। चिकित्सकीय रूप से आवश्यक होने पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) की उपलब्धता सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुनिश्चित की जा रही है। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नागरिक अस्पताल, क्षेत्रीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज शामिल हैं, ताकि मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके।





