कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में घुमारवीं के विकास को लगा ग्रहण: राजेंद्र गर्ग

ज्जवल हिमाचल।बिलासपुर

पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग ने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में घुमारवीं के विकास पर पूरी तरह ग्रहण लग गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजनाएं लाना तो दूर, पहले से चल रही योजनाओं और संस्थानों पर भी ताले लगा दिए गए, जिससे क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। राजेंद्र गर्ग ने कहा कि बीते तीन वर्षों में घुमारवीं के 14 स्कूल और एक दर्जन से अधिक सरकारी संस्थान बंद या डिनोटिफाई किए गए। उन्होंने कहा कि घुमारवीं से चुने गए प्रतिनिधि सरकार में मंत्री होते हुए भी इन संस्थानों को दोबारा खुलवाने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष प्रभावी ढंग से आवाज नहीं उठा सके, जो क्षेत्र का दुर्भाग्य है। गर्ग ने बताया कि 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का घुमारवीं दौरा प्रस्तावित है और उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री बंद व डिनोटिफाइड संस्थानों को पुनः खोलने की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को राहत देंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में भराड़ी में तहसील, हतवाड़ पीएचसी को 10 बिस्तरों का दर्जा देकर 24 घंटे चिकित्सक की व्यवस्था, पड़यालग पीएचसी का विस्तार, कपाहड़ा में पीडब्ल्यूडी सब-डिवीजन व सेक्शन, आईपीएच सेक्शन, भगेड़ में पीडब्ल्यूडी सेक्शन, पनियाला व तीयून खास में वेटरनरी डिस्पेंसरी जैसी जनसुविधाएं शुरू की गई थीं, लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन्हें बंद कर दिया।

राजेंद्र गर्ग ने कहा कि सतलुज नदी से 53 करोड़ रुपये की पेयजल योजना का 90 प्रतिशत कार्य भाजपा सरकार में पूरा हो चुका था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इस योजना पर 10 प्रतिशत भी काम नहीं हो पाया। इसी तरह घुमारवीं शहर की सीवरेज योजना से छूटे घरों को जोड़ने के लिए स्वीकृत 13 करोड़ रुपये भी आज तक फाइलों में ही सिमटे हुए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में तीन सालों से सूखा कूड़ा जलाया जा रहा है, लेकिन सरकार और मंत्री आंखें मूंदे बैठे हैं। पुल से मेला मैदान तक सड़क कार्य, 64 करोड़ रुपये की 132 केवी विद्युत योजना, दाबला–गतोल, गाहर–केट–नसवाल सड़क सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्य ठप पड़े हैं।

मिनी सचिवालय का निर्माण कार्य भी अत्यंत धीमी गति से चल रहा है।गर्ग ने कहा कि संस्कृत कॉलेज को भी डिनोटिफाई किया गया, जिसे जागरूक जनता ने अदालत में चुनौती दी, तब जाकर दोबारा सरकारीकरण संभव हो पाया। वहीं डिग्री कॉलेज घंडालवीं के लिए भवन निर्माण हेतु 5 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

संवाददाता : सुरेंद्र जम्वाल