जंगलों की आग से तपने लगे पहाड़, इंसान करने लगे हे राम…!

तापमान में हुई रिकॉर्ड तोड बढ़ोतरी

उज्जवल हिमाचल। ज्वाली 
हर साल जंगलों में आग लगती है और बहुमूल्य वन संपदा नष्ट होती है। वन विभाग और हिमाचल सरकार नजारा देखते रहते है। समझ में नहीं आता कि हर साल आग लगती है या फिर लगाई जाती है। इसका आज दिन तक कोई खुलासा नहीं हुआ है और न ही विभाग के पास आग को काबू करने वाले साधन उपलब्ध है। किसानों की भूमि पर आग क्यों नहीं लगती है और कभी कभार लगती भी है तो उसका कोई न कोई कारण भी नजर आ जाता है ।लेकिन जंगलात में ऐसा नहीं है जोकि चिंताजनक विषय है।
ध्यान रहे कि अगर वन रक्षक सुरक्षित नही तो जंगल भी सुरक्षित नहीं  अगर जंगल सुरक्षित नही तो मानव जीवन भी असुरक्षित है। आजकल अधिकतर जंगलों की देखभाली के लिए महिला वन रक्षक तैनात किए जा रहे है। पुरुष वन रक्षकों के शव जंगलों में मिलने के समाचार मिलते है ऐसे में महिला वन रक्षक केसे जंगलों को बचा पाएंगे। बता दें की ज्वाली रेंज के खब्बल बीट में 10-12 दिनों से लगातार चारों तरफ आग लगी हुई है, काबू नहीं हो रही है। यहां तक कि अग्निशमन विभाग की टीम भी आनी सेवाएं दे रही है और वहां पर तैनात महिला वन रक्षक बलविंदर कौर दिन रात अपनी ड्यूटी स्थानीय लोगों के सहयोग से बखूबी से निभा रही है लेकिन आग रुकने का नाम नहीं ले रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला वन रक्षक द्वारा दिन रात निर्भीक होकर अपना फर्ज निभाने पर हमें बहुत ही गर्व है। दूसरा महिला वन रक्षक ने लोगों से अपील की है कि वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की मदद करे क्योंकि वन हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। हमारा जीवन वनों  अपर ही निर्भर है । यह हमारी बहुत ही वहुमुल्य संपदा है। जंगलों की आग से कई किस्म के जीव जंतु जल कर राख हो जाते है जोकि बहुत ही पाप है। जीवन जीना सभी का अधिकार है इसलिए वनों को आग से बचाने का तात्पर्य यह है कि अगर वन सुरक्षित है तो ही मानव प्रजाति और वन्य प्राणी सुरक्षित रह सकते है।

संवाददाताः चैन गुलेरिया

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