उज्जवल हिमाचल। कांगड़ा
आम आदमी पार्टी, हिमाचल प्रदेश इकाई केंद्र सरकार की गरीब-विरोधी और तानाशाही नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार से कड़ी मांग करती है कि वह पंजाब की भगवंत मान सरकार की तर्ज पर तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करे और ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के खिलाफ एक मजबूत प्रस्ताव पारित करे। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बर्बाद करने की एक घिनौनी साजिश है, जो करोड़ों ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और महिलाओं की आजीविका पर सीधा प्रहार है। ज्ञात रहे कि पंजाब विधानसभा ने 30 दिसंबर को सर्वसम्मति से ‘ वी बी-जी राम जी ‘ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर एक मिसाल कायम की है, जिसमें केंद्र पर गरीबों के अधिकार छीनने और संघवाद को कुचलने का आरोप लगाया गया।
यह बात जारी प्रेस बयान में आम आदमी पार्टी के राज्य समन्वयन समिति के सदस्य व कांगड़ा जिला के मीडिया इंचार्ज कल्याण भंडारी ने कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की यह योजना मनरेगा का गला घोंटने का षड्यंत्र है। जहां मनरेगा गरीबों को मांग-आधारित रोजगार का अधिकार देता था, वही विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) राज्यों पर वित्तीय बोझ थोपकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तबाह करने की तैयारी है। हिमाचल प्रदेश में लाखों मजदूरों की कमर टूट जाएगी, कृषि संकट गहराएगा और महिलाओं की भागीदारी खत्म हो जाएगी।
क्या सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार गरीबों की आवाज दबाने में केंद्र की भागीदार बनेगी ? भंडारी ने कहा कि सुक्खू सरकार तत्काल विधानसभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र बुलाए जिसमें इसे ‘गरीबों पर हमला’ घोषित कर मनरेगा की बहाली की मांग की जाए। इसके साथ केंद्र द्वारा रोके गए मनरेगा फंड्स की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की करवाई जाए, वरना यह साबित होगा कि मोदी सरकार ग्रामीण भारत को बर्बाद करने पर तुली है।





