उज्जवल हिमाचल । कांगड़ा
इफको कांगड़ा द्वारा उपनिदेशक (कृषि) जिला कांगड़ा के कार्यालय परिसर, पालमपुर में कृषि विभाग के खंड स्तर पर कार्यरत विषय विशेषज्ञों, कृषि विकास अधिकारियों एवं कृषि प्रसार अधिकारियों के लिए “एक दिवसीय नैनो उर्वरक प्रशिक्षण कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों को नैनो उर्वरकों के उपयोग, लाभ एवं नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न कृषि खंडों से लगभग 70 अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर इफको हिमाचल प्रदेश के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. सुधीर सिंह कटियार, कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. राहुल कटोच, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के मृदा वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राज पॉल शर्मा, सस्य वैज्ञानिक डॉ. संदीप मनुजा, उपनिदेशक (कृषि) डॉ. कुलदीप धीमान तथा इफको कांगड़ा के क्षेत्र अधिकारी श्रेय सूद विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. सुधीर सिंह कटियार ने इफको द्वारा विकसित नैनो उर्वरकों, जिनमें नैनो यूरिया तरल, नैनो डीएपी, नैनो कॉपर, नैनो जिंक तथा जैविक उर्वरक शामिल हैं, के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक दानेदार उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है, जिससे कृषि लागत में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक डॉ. संदीप मनुजा और डॉ. राज पॉल शर्मा ने प्रस्तुति के माध्यम से नैनो उर्वरकों पर विश्वविद्यालय में किए गए शोध एवं वर्तमान अनुसंधानों के सकारात्मक परिणामों को प्रतिभागियों के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का प्रभावी उपयोग किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरकों के संतुलित उपयोग को भी सुनिश्चित करता है।
अतिरिक्त निदेशक (कृषि) डॉ. राहुल कटोच ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे जमीनी स्तर पर किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करें तथा इनके अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य की टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग, प्रभावशीलता और कृषि क्षेत्र में उनकी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की तथा विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं।





