उज्ज्वल हिमाचल । कांगड़ा
कांगड़ा जिले के गगल हवाई अड्डे के महत्वाकांक्षी विस्तार से विस्थापित हो रहे 8 ग्राम पंचायतों के 980 परिवारों और करीब 3500 प्रभावित लोगों ने अब सरकार और विमानपत्तन प्राधिकरण के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। प्रभावित क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि देश-प्रदेश के विकास के नाम पर उन्होंने अपनी पीढ़ियों की पुश्तैनी जमीनें और आशियाने कुर्बान कर दिए, लेकिन बदले में उन्हें आज तक बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हुईं।
इसको लेकर ग्राम पंचायत सनौरा के गांव आंतरी निवासी कैप्टन अश्वनी कुमार के नेतृत्व में सनौरा, कुल्था, रछियालू, डुगियारी, गग्गल, इछ्छी, नंदेह और बैदी, इन 8 पंचायतों के प्रधानों ने प्रधानमंत्री, नागर विमानन मंत्री, मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश और उपायुक्त कांगड़ा को एक संयुक्त विस्तृत मांग-पत्र भेजा है। इस मांग-पत्र की प्रति प्रेस को भी जारी की गई है।
मांग-पत्र में कैप्टन अश्वनी कुमार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 1985 में बना गग्गल हवाई अड्डा पिछले 41 वर्षों से लगातार चल रहा है और इस दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधीन उड़ान भरने वाली सभी निजी और व्यावसायिक विमानन कंपनियों ने यहां से करोड़ों रुपये का वाणिज्यिक लाभ कमाया है। कंपनियों ने तो मुनाफा कमाया, लेकिन स्थानीय लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा।
उन्होंने कहा कि एक बसे-बसाए और सुस्थापित परिवेश से उजड़कर नई जगह पर बसना बेहद पीड़ादायक है। इसलिए ग्रामीण इन कंपनियों के कुल लाभ का सरकार द्वारा तय 2 प्रतिशत निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व कोष से बुनियादी नागरिक सुविधाएं पाने के पूर्ण हकदार हैं। विस्तार के कारण क्षेत्र में पहले से मौजूद सरकारी विद्यालय, गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग, गलियों की बत्तियां और बावड़ियों जैसे पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जिसके चलते नई बसाई जा रही बस्तियों में पेयजल, बिजली, सड़क और शिक्षा का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
उन्होंने बताया कि नियमानुसार पिछले 12 वर्षों का बकाया धनराशि के तौर पर इस कोष का भुगतान करना अनिवार्य था, ताकि प्रभावित क्षेत्र का पुनर्विकास हो सके, लेकिन केंद्रीय सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह है कि भू-अधिग्रहण के कारण पहले से बना बुनियादी ढांचा तो टूट गया, लेकिन नया कुछ नहीं बना, जिससे क्षेत्र का विकास बुरी तरह चरमरा गया है और लोग बुरी तरह विस्थापित हुए हैं।
अंत में समस्त ग्राम प्रधानों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि हवाई अड्डा प्राधिकरण को तुरंत निर्देश दिए जाएं कि वह विशेष निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व कोष के तहत कुल लाभ का 2 प्रतिशत बजट धनराशि स्वीकृत करे। इस राशि से पुनर्वास स्थलों पर प्राथमिकता के आधार पर ऊंची पानी की टंकियां, पक्के मार्ग, सौर ऊर्जा से चलने वाली गलियों की बत्तियां, आधुनिक सरकारी विद्यालय, स्वास्थ्य उपकेंद्र और युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं खड़ी की जाएं। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि विकास के लिए ग्रामीणों का विस्थापन अनिवार्य था, तो उन्हें सम्मानजनक ढंग से बसाना भी सरकार और प्राधिकरण की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।





