उज्ज्वल हिमाचल। कांगड़ा
प्रदेश में पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण हिमाचल से लेकर पंजाब तक पौंग के पानी का खौफ बन गया है। हालांकि यह है कि प्रदेश के 400 से अधिक लोगों को घर वार छोड़ कर राहत शिविरों में रातें काटने पड़ रही हैं। भारी बारिश और बाढ़ के चलते काम धंधे भी पूरी तरह से ठप हो गए हैं। खेतों में फसल भी बाढ़ के कारण में बह गई है। इंदौरा और फतेहपुर के कुछ क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ फसल पानी में बह गई है। मंगलवार सुबह नौ बजे पौंग डैम का जलस्तर 1,390.84 फुट दर्ज किया गया, जो निर्धारित खतरे के निशान 1,390 फुट से अधिक था। मंगलवार को जलप्रवाह 1,32,618 क्यूसेक रहा। सोमवार को जलप्रवाह 79,790 क्यूसेक था।
इस प्रकार, 24 घंटों में जलप्रवाह में 52,828 क्यूसेक की वृद्धि हुई है। जलस्तर बढऩे के कारण छह चालू मशीनों और स्पिलवे गेटों के जरिए 79,891 क्यूसेक पानी छोड़ा। हालांकि मंगलवार का जलप्रवाह सोमवार के 1,09,920 क्यूसेक से कम था। इसमें से 17,079 क्यूसेक पानी टरबाइन के जरिए, जबकि 62,812 क्यूसेक स्पिल-वे गेटों से छोड़ा गया। शाहनहर बैराज के निचले हिस्से में 68,391 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि मुकेरियां हाइडल चैनल में 11,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा का कहना है कि आपदा प्रबंधन टीमों, पंचायतों और राजस्व अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है। निचले इलाकों के ग्रामीणों, विशेष रूप से इंदौरा और फतेहपुर उपमंडलों के निचले इलाकों में, बाढ ग्ऱस्त खेतों और नदी के किनारों से दूर रहने की सलाह दी गई है।





