जनता का पैसा लुटाया जा रहा है, देना होगा पाई-पाई का हिसाब कल्याण भंडारी

उज्ज्वल हिमाचल। धर्मशाला

आम आदमी पार्टी, हिमाचल प्रदेश ने कैग की 2023-24 की राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासों पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार जोरदार सियासी हमला बोला है। कांगड़ा से जारी एक प्रैस रिलीज़ में पार्टी की ओर से कल्याण भंडारी ने कहा कि यह रिपोर्ट कांग्रेस सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदाराना नीतियों का नंगा प्रमाण है, जो राज्य को कर्ज के गहरे गड्ढे में धकेल रही है। 95,632.96 करोड़ रुपए की कुल देयताएं, जो जीव एसव डीव पीव का 43.98 प्रतिशत से अधिक है, और 11,265.73 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा साफ दर्शाता है कि सरकार ने हिमाचल को दिवालियेपन की कगार पर ला खड़ा किया है। ब्याज भुगतान में 16.98प्रतिशत की भारी वृद्धि और राजस्व घाटा 5,558.59 करोड़ रुपए तक पहुंचना आम जनता पर बढ़ते करों, महंगाई और कटौतियों का सीधा बोझ है, यह सब कांग्रेस की लोकलुभावन योजनाओं और भ्रष्ट तंत्र की देन है।

सरकार की लापरवाही की हद तो देखिए कि 94.35 करोड़ रुपयों का व्यय बिना किसी बजट प्रावधान के किया गया जोकि संवैधानिक उल्लंघन ही नहीं, बल्कि जनता के पैसे की खुली लूट है। 2,990 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं, जिनमें 2,795.23 करोड़ रुपए की राशि फंसी है, और 2023-24 के 1,342 प्रमाणपत्रों में 1,744.60 करोड़ रुपए शामिल, यह पैसा कहां गया, सरकार क्यों चुप है? क्या यह भ्रष्टाचार छिपाने की साजिश है? अनुपूरक अनुदान में 711 करोड़ रुपए अनावश्यक और 1,318 करोड़ रुपए अपर्याप्त होने से बजट प्रक्रिया को खिलौना बना दिया गया है। एसवडीव आरव एफव बैलेंस का 55.55 करोड़ निवेश नहीं किया गया, जिससे आपदा प्रबंधन कमजोर हुआ, और वनरोपण फंड में6.51 करोड़ का डायवर्जन, यहां तक कि जंगलों में पहले से मौजूद घने वनों में पौधारोपण दिखाकर घोटाला किया गया।

पूंजीगत व्यय में 6.62 प्रतिशतकी शर्मनाक कमी आई, और केवल 37.78 प्रतिशत उधार का उपयोग पूंजी निर्माण पर किया गया। बाकी पैसा वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। राजस्व प्राप्तियां सिर्फ 39,173.04 करोड़ रहीं जो पिछले साल से महज 2.84 प्रतिशत अधिक हैं जबकि केंद्रीय अनुदानों में कमी ने कुल प्राप्तियां 54,104 करोड़ तक गिरा दीं। मार्च में व्यय की भागदौड़ चौथी तिमाही में 50 प्रतिशत से अधिक से साफ है कि सरकार पारदर्शिता की बजाय हेराफेरी में माहिर है। स्वायत्त निकायों और पीव एसव यूव के 54 खाते लंबित हैं, जो पारदर्शिता की कमी और संभावित घोटालों की ओर इशारा करते हैं।

कैग की सिफारिशें, जैसे खातों की समयबद्ध प्रस्तुति, वित्तीय नियंत्रण मजबूत करना, बजट अनुमानों में सुधार और बेकार फंडों का निवेश, सरकार के लिए महज कागजी हैं। हिमाचल की जनता अब इस लुटेरे शासन का हिसाब मांगेगी, विकास के नाम पर कर्ज का बोझ थोपना बंद हो, वरना जनता सड़कों पर उतरेगी!