उज्जवल हिमाचल।हमीरपुर
वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी के रूप में लगभग 6 वर्ष तक पश्चिम बंगाल में कार्य कर चुकी गंधर्वा राठौड़ ने हिमाचल प्रदेश काडर में आने के बाद कांगड़ा जिले में एडीसी के पद से अपनी सेवाएं आरंभ की थीं। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक और महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। हमीरपुर की उपायुक्त पर नियुक्ति से पहले वह कार्मिक विभाग के विशेष सचिव और हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम की प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दे रही थीं।
गंधर्वा राठौड़ ने जयपुर में प्रारंभिक एवं सेकंडरी शिक्षा के बाद दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल श्रीराम कालेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया है और वर्ष 2016 में आईएएस की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल काडर मिला था। कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र से संबंध रखने वाले हिमाचल प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी अनुराग चंद्र शर्मा से विवाह के बाद गंधर्वा राठौड़ ने हिमाचल प्रदेश काडर में आने का निर्णय लिया। वह जिला हमीरपुर की पांचवीं महिला उपायुक्त हैं। इससे पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुरए नंदिता गुप्ताए डॉ ऋचा वर्मा और देवश्वेता बनिक भी जिला हमीरपुर की उपायुक्त रह चुकी हैं।
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया के साथ अनौपचारिक बातचीत में गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करनाए इनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना और आम लोगों को बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। नवनियुक्त उपायुक्त ने बताया कि वह कौशल विकास निगम में कार्य कर चुकी हैं और युवाओं के कौशल विकास तथा महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष रूप से फोकस करेंगी। इससे पहले हमीरपुर पहुंचने पर जिला के कई वरिष्ठ अधिकारियों और उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारियों ने गंधर्वा राठौड़ का स्वागत किया तथा उन्हें जिला की परिस्थितियों एवं विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाया।
हिमाचल प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी सामाजिक पहल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ रही हैए बल्कि कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला रही है। ऊना जिले में इस योजना के तहत अब तक 2189 बच्चों को 2 करोड़ 61 लाख 48 हजार 722 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच से शुरू की गई यह योजना विशेष रूप से उन बच्चों के लिए संबल बनी हैए जिनकी माताएं विधवा तलाकशुदा परित्यक्ता या निराश्रित हैं ।
अथवा जिनके माता.पिता 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से पीड़ित हैं। सरकार ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान कर रही हैए जिससे उनकी शिक्षाए पोषण और बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। वहीं 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के वे विद्यार्थी जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और छात्रावास सुविधा से वंचित हैंए उन्हें 3000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है।क्या कहते हैं अधिकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी ;आईसीडीएसद्ध नरेंद्र कुमार ने बताया कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई हैए जहां बच्चों की पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन गया था। उन्होंने बताया कि ऊना जिले के सभी विकासखंडों में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप योजना को जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र बच्चा इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। योजना का वास्तविक प्रभाव लाभार्थी परिवारों के अनुभवों से स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। लाभार्थी तन्मयए जो वर्तमान में ग्यारहवीं कक्षा में अध्ययनरत हैंए बताते हैं कि पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी और उनकी पढ़ाई छूटने का डर सता रहा था। इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना ने उन्हें नया हौसला दिया और आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रहे हैं।
ऊना वार्ड नंबर.6 की पूजा पुरी बताती हैं कि पति के निधन के बाद दो बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया थाए लेकिन छह माह में मिली 12 हजार रुपये की सहायता ने उन्हें बड़ा सहारा दिया। वहीं कोटला कलां की सरोज बाला और ऊना की रेणु देवी सहित अनेक महिलाओं ने इस योजना को अपने बच्चों के लिए संजीवनी बताते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का आभार व्यक्त किया है। इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना आज न केवल आर्थिक सहायता का माध्यम हैए बल्कि यह बच्चों को आत्मनिर्भरए शिक्षित और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार बन रही है।





