हिमाचली धाम के स्वाद ने जीता दिल, नंद लाल ने व्यंजनों के साथ सुनाई हिमाचल की संस्कृति की कहानी

उज्जवल हिमाचल । कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश की समृद्ध खानपान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की खुशबू देश के एक खास मंच तक पहुंची, जहां प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों ने अपनी अलग पहचान बनाई। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के नामी शैफ नंद लाल ने हर एक्सीलेंसी के साथ हिमाचल की पारंपरिक पाक कला, विशेषकर हिमाचली धाम और भाप से तैयार होने वाले व्यंजनों को लेकर विस्तृत बातचीत की। उन्होंने व्यंजनों के स्वाद के साथ उनसे जुड़ी परंपराओं, इतिहास और लोकजीवन की कहानियां भी साझा कीं।

मेन्य में हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सिड्डू, मक्की पचोले, इंद्रा, पतेड़, गगरोलू, गुच्छी चना मदरा, सेपू बड़ी, तेली माह, पालदा, छुहारे का रायता, रोंगी, दाना भात लाल चावल, अंबला कद्दू, औरिया मूंग, अंबुआ और बादाने का मीठा शामिल रहा। हर व्यंजन को उसकी कहानी और सांस्कृतिक महत्व के साथ प्रस्तुत किया गया।
इस दौरान गुच्छी की खासियत भी बताई गई कि बर्फ पिघलने के बाद जंगलों में कुछ भाग्यशाली ग्रामीणों को प्राकृतिक रूप से मिलने वाली यह मशरूम हिमालय के सबसे बेशकीमती उपहारों में शामिल है। वहीं हिमाचली धाम की परंपरा बताते हुए कहा गया कि लोग पंगत में बैठकर पत्तल पर भोजन करते हैं और धाम सामूहिक रूप से तैयार की जाती है। यह परंपरा गांव की एकता, सहयोग, सेवा भावना और आपसी भाईचारे का प्रतीक है।

पारंपरिक व्यंजनों और उनसे जुड़ी कहानियों को हर एक्सीलेंसी ने खूब सराहा। इस अवसर को हिमाचल के किसानों, गृहणियों, पारंपरिक बोटियों और उन पीढ़ियों को समर्पित किया गया, जिन्होंने सदियों से प्रदेश की खानपान विरासत को संजोकर रखा है।

नंद लाल ने दिखाई हिमाचल की असली पाक पहचान : दिशांत कपिल

हिमाचल प्रदेश भाजपा पर्यटन प्रकोष्ठ के सह संयोजक, पर्यटन व्यवसायी एवं लेखक दिशांत कपिल ने नंद लाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हिमाचली खानपान को महज व्यंजनों के तौर पर पेश नहीं किया, बल्कि इनके पीछे छिपी हिमाचल की संस्कृति, इतिहास, परंपराओं और लोकजीवन को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि हिमाचली धाम और पारंपरिक व्यंजनों को देश-दुनिया के मंच पर सम्मान के साथ प्रस्तुत करना प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला प्रयास है।

मूल रूप से हिमाचल से संबंध रखने वाले और दिल्ली को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले दिशांत कपिल ने कहा कि नंद लाल ने जिस आत्मीयता और जानकारी के साथ हिमाचली खानपान की परंपराओं को प्रस्तुत किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। ऐसे प्रयासों से हिमाचल की समृद्ध खाद्य विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ प्रदेश के पर्यटन को भी नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

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