ईश्वर की प्राप्ति ही मानव जीवन का है उद्देश्य : स्वामी हरीशानन्द

कांगड़ा में तीन दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन

उज्ज्वल हिमाचल। कांगड़ा

दिव्य ज्योति जाग्रित संस्थान की ओर से कथुरिया निवास जयंती बिहार कांगड़ा में तीन दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन किया गया। जिसके प्रथम दिवस में उपस्थित भक्तिजनों को संबोधन करते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी हरीशानंद ने कहा मानव जीवन प्रभु की सर्वोत्तम रचना है इस जीवन का उद्देश्य ईश्वर की भक्ति करना है माया के प्रभाव के कारण मानव इस संसार के भोग पदार्थों के पीछे ही निरंतर भगता रहता है और इस मानव जीवन को व्यर्थ ही गंवाकर इस संसार से चला जाता है।

आगे स्वामी ने कथा प्रसंग के माध्यम से भक्त ध्रुव के जीवन चरित्र को भक्तजनों के समक्ष बताते हुए कहा भक्त ध्रुव ने छोटी आयु में ही भक्ति करके, ईश्वर को प्रसन्न कर लिया उनका यह जीवन हमें प्रेरणा देता है कि मृत्यु का कोई भी सुनिश्चित समय व स्थान नहीं है पता नहीं काल हमे किस समय अपना ग्रास बना ले हमें जब भी संतो महापुरुषों की वाणी से उपदेश मिले उस समय हमें जागृत होकर अपने जीवन के उद्देश्य को प्राप्त करना चाहिए जिस प्रकार से भक्तध्रुव सांसारिक पिता की गोद को पाना ही सब कुछ समझते थे। परंतु माता के सुविचारों को सुन उन्होंने ईश्वर भक्ति को प्राप्त किया।

इसी प्रकार से हम भी इस सांसारिक भौतिक पदार्थों को ही सब कुछ मानते हैं, जब हम संसार में नहीं रहेंगे तब भी यह संसार इसी प्रकार से चलता ही रहेगा,किसी के भी संसार से चले जाने से संसार का कार्य नहीं रुकता इसलिए जितना जल्दी हो सके मानव जीवन के उद्देश्य को जानकर प्रभु भक्ति में अपने जीवन को व्यतीत करें। इसी अवसर पर सुखदेव और सुनील द्वारा समुधर प्रभु महिमा में भजनों का गायन किया गया विशेष रूप में कथरिया परिवार की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया व कथा को विराम प्रभु की मंगल पुनीत आरती से दिया गया।

ब्यूरो रिपोर्ट कांगड़ा

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