खारल जंगल में विभाग के नाक तले कट गए खैर के पेड़

विभाग ने 26 खैर के पेड़ों के कटे होने की पुष्टि की, 21 पेड़ों की डैमेज रिपोर्ट काटी गई

एसके शर्मा। बड़सर

लॉकडाडन के दौरान एक तरफ जहां जनता सरकार के आदेशों का पालन करते हुए घरों में दुबकी रही। वहीं, इसी लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए वन काटुओं ने ऐसा कहर मचाया कि खैर के दर्जनों पर अवैध रुप से कुल्हाड़ी चला डाली। मामला जिला हमीरपुर के अंतर्गत वन परिक्षेत्र बिझड़ी के खारल जंगल का है। जहां लॉकडाउन के दौरान ही वन माफिया ने दर्जनों पेड़ों का सफाया कर डाला।

बड़ी बात यह है कि यह जंगल डीपीएफ श्रेणी में आता है। जहां से किसी भी गतिविधि के लिए विशेष अनुमति की जरूरत होती है, लेकिन इसी डीपीएफ एरिया में वन माफिया ने ऐसा कहर मचाया है कि खैर के एक दो नहीं, बल्कि दर्जनों पेड़ों को काटकर लॉकडाउन के दौरान ही खुर्दबुर्द कर डाला। मामला तब उजागर हुआ जब खैरों के इस अवैध कटान की शिकायत क्षेत्र के लोगों द्वारा वन विभाग को भी की गई। विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में जब मामला आया, तो विभाग के उप वन संरक्षक ने खारल जंगल के कुछ भाग का मुआयना करके मौके पर 26 खैर के पेड़ों के कटे होने की पुष्टि की तथा इनमें से 21 पेड़ों की पांच लोगों के नाम डैमेज रिपोर्ट काटी गई है।

इस डैमेज रिपोर्ट में लगभग 9 लाख 14 हजार की पैनल्टी लगाई गई है। सूत्र खुलासा करते है कि इस जंगल में खैर के सैंकड़ों पेड़ों के कटे होने की संभावना है, जिनकी कीमत करोड़ों में है, जबकि कुछ लोगों द्वारा भी वन विभाग को की गई शिकायत में भी 200 पेड़ कटे होने का दावा किया गया है। बेशक विभाग ने कुछ लोगों के नाम डैमेज रिपोर्ट काटकर अपने कर्तव्य से इतिश्री कर ली, लेकिन पेड़ काटकर खुर्दबुर्द करने वाले असली सरगना इस सिरियल से बाहर हैं। पता चला है कि वन माफिया ने अपने आप को पीछे रखकर कुछ मोहरों को आगे कर दिया है, ताकि उनकी छबी पाक साफ बनी रहे।

गंभीर विषय यह है कि 22 मार्च को शुरू हुए पूर्ण लॉकडाउन के दौरान तमाम गतिविधियां बंद थी तथा सिवाए स्वास्थ्य, पुलिस व बड़े अधिकारियों के अलावा किसी व्यक्ति को बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। इसके अलावा वाहनों की आवाजाही पर भी पूर्ण रोक थी। खैर के पड़ों को काटा ही नहीं गया, बल्कि इस लॉकडाउन के दौरान इन खैर के पेड़ों के मोछे बनाकर इन्हें बेचा भी गया है। पुलिस का कड़ा पहरा होने के बावजूद अगर खैर की गाड़ियां पूर्ण लॉकडाउन में भी गई हैं, तो इसके पीछे बहुत बड़ा वन माफिया गिरोह काम कर रहा था तथा बड़े ही सुनियोजित ढंग से इस अवैध कार्य को अंजाम दिया
गया है।

हैरत तो यह है कि बिझड़ी वनपरिक्षेत्र कार्यालय व पैहरवीं वीट गार्ड कार्यालय से खारल जंगल की दूरी मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। यानी विभाग के नाक तले खैर के पेड़ कट गए, लेकिन विभाग मूकदर्शक बना रहा। ऐसे में विभागीय गर्मियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। वनपरिक्षेत्राधिकारी बिझड़ी अंकुश ठाकुर का कहना है कि मैने हाल ही में ज्वाइन किया है।

मामले की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर एसीएफ के नेतृत्व में विभाग की टीम ने दौरा किया, जिसमें 26 खैर के पेड़ों के कटे होने की पुष्टि की गई है। खारल जंगल में और भी पेड़ों के कटे होने की संभावना के चलते जंगल का निरीक्षण किया जा रहा है। दोषियों की किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत पड़ी, तो इनके खिलाफ एफआईआर भी करवाई जाएगी।